Jameel Attari

what is generic medicines generic vs branded medicines | जेनेरिक दवाइयां क्या होती है जेनेरिक दवाइयां ब्रांडेड दवाइयों से इतनी सस्ती क्यों होती है

जेनेरिक दवाइयां क्या होती है? जेनेरिक दवाइयां ब्रांडेड दवाइयों से इतनी सस्ती क्यों होती है?

दोस्तों, भारत पूरी दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्माता है| करोड़ों की जेनेरिक दवाइयां भारत पूरी दुनिया में निर्यात भी करता है लेकिन अफसोस भारत में इन दवाओं का चलन नहीं है| इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि यह जेनेरिक दवाइयां होती क्या है और जेनेरिक और ब्रांडेड  दवाओं में क्या अंतर है?

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Table of Content
  1. जेनेरिक दवाइयां किसे कहते हैं?
  2. जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों में अंतर
  3. डॉक्टर जेनेरिक दवाइयां क्यों नहीं लिखते


जेनेरिक दवाइयां किसे कहते हैं?

  • जब भी कोई कंपनी किसी बीमारी के लिए दवाई बनाती है तब वह उस दवाई का पेटेंट करवा लेती है ताकि कोई और उस दवा का निर्माण नहीं कर सके|
  • दवाई का पेटेंट निर्धारित समय के लिए होता है|
  • पेटेंट का निर्धारित समय पूरा होने के बाद कोई भी कंपनी उस दवा का निर्माण कर सकती है|
  • इस तरह बनने वाली दवाई जेनेरिक दवाइयां कहलाती है|
  • जेनेरिक दवाइयों का अपना कोई नाम नहीं होता दवाई का  सॉल्ट उसका नाम बन जाता है|
  • जेनेरिक दवाइयां ब्रांडेड दवाइयों के समान ही होती है|
  • जेनेरिक दवाइयों में वही सॉल्ट होता है जो ब्रांडेड दवाइयों में होता|
  • जब ब्रांडेड दवाइयों का सॉल्ट मिश्रण और उत्पादन का पैटर्न समाप्त हो जाता है तब उन्हीं के फार्मूले और सॉल्ट से जेनेरिक दवाइयां बनाई जाती है|
  • जेनेरिक दवाइयां ब्रांडेड दवाइयों के समान होती है फर्क बस पैकेजिंग ब्रांडिंग और मार्केटिंग का फर्क होता है|
  • हम समझते हैं उसके जेनेरिक दवाइयां होती क्या है|
  • मान लीजिए हम बाजार में आटा खरीदने के लिए जाते हैं|
  • जिस दुकान पर खुला आटा मिल रहा होता है वहां रेट पता करते हैं|
  • साथ ही पास वाली दुकान पर पैकिंग किए हुए आटा की रेट  पता करते हैं
  • हम यह देखेंगे कि दोनों की रेट में बहुत ज्यादा फर्क है|
  • आखिर इतना फर्क क्यों है|
  • खुला हुआ था एक तरह से जेनेरिक दवा  दवा की तरह है|
  • पैकिंग आटा एक तरह से ब्रांडेड  दवा की तरह है|
  • खुले हुए आटे  और पैकिंग आटे में ब्रांड का फर्क है और पैकेजिंग का|
  • ठीक इसी तरह जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं में कंपनी के ब्रांड और उसकी पैकेजिंग की वजह से बहुत ज्यादा फर्क होता है|


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जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों में अंतर

  • जब कोई कंपनी  नई दवा बनाती है तो इसके लिए रिसर्च डेवलपमेंट मार्केटिंग प्रचार और ब्रांडिंग पर पर्याप्त लागत आती है लेकिन जेनेरिक दवाएं पहले डेवलपर्स की पेटेंट अवधि की समाप्ति के बाद उसी के फार्मूले और सोल्ड से  बनाई जाती है|
  • ब्रांडेड दवाइयां बेचने में बहुत बड़े स्तर पर मार्केटिंग और ब्रांडिंग की जाती है लेकिन जेनेरिक दवाओं में ऐसा नहीं होता है|
  • जब जेनेरिक दवाएं मार्केट में उतारी जाती है तो यह बहुत बड़ी मात्रा में होती है|
  • जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों में मुख्य रूप से ब्रांडिंग पैकेजिंग स्वाद और रंग में अंतर होता है|


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डॉक्टर जेनेरिक दवाइयां क्यों नहीं लिखते
  • जब भी आप किसी डॉक्टर को दिखाने जाते हैं तब डॉक्टर जेनेरिक दवाइयां नहीं लिखते आखिर इसका क्या कारण होता है?
  • जब आप डॉक्टर के पास दिखाने जाते हैं तब आपने देखा होगा कि कई बार डॉक्टर के पास सूट बूट पहने लोग आते रहते हैं जिन्हें एमआर कहते हैं|
  • एमआर डॉक्टर्स को ब्रांडेड दवाइयां लिखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं|
  •  ब्रांडेड दवाइयां लिखने के बदले में डॉक्टर को गिफ्ट कार्ड टूर पैकेजेस बड़ी मात्रा में  नकद  आदि  कमीशन के तौर पर दिया जाता है|
  • इन्हीं कारणों से डॉक्टर जेनेरिक दवाइयां नहीं लिखकर ब्रांडेड दवाइयां ही लिखते हैं|
  • एमआर को आपने मेडिकल की दुकानों पर भी देखा होगा|
  • एमआर मेडिकल की दुकानों पर भी दुकानदारों को ब्रांडेड दवाइयां बेचने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और उसके बदले में काफी बड़ी मात्रा में कमीशन भी देते हैं|



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